मैं चौकीदार....

मैं चौकीदार....

बात एक साल पहले की है। बात चल रही थी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। तभी मेरे एक मित्र ने एक कहानी सुनाई । एक छात्र जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाह रहा था। वह किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला के उद्देश्य से जानकारी लेने के लिए पहुंचा।


कालेज के मेन गेट पर ही सबसे पहले उसने दरबान से कालेज की व्यवस्था के बारे में कुछ पूछा। वह काफी समझदारी के साथ पढ़े - लिखे व्यक्ति के अंदाज़ में बताने लगा। फिर उस छात्र ने कालेज में उपलब्ध आधारभूत संरचना के बारे में उस गार्ड जी से जानकारी ली। उसने इस संबंध में भी कायदे से बताया।

गार्ड की बातों से छात्र और उसके गार्जियन काफी प्रभावित हुए। उस गार्ड के प्रति उनका सम्मान भी काफी बढ़ गया। एक अच्छी समझ भी बन गयी। तभी आदर के साथ उस छात्र के गार्जियन ने पूछा, अच्छा गार्ड साहब इस कालेज के छात्रों का प्लेसमेंट होता है।
गार्ड साहब ने गर्व के साथ बताया यहां के छात्रों को रोजगार पाने में कोई दिक्कत नहीं होती। मैं भी तो यहीं से पास आउट हूं। अब इसके आगे शायद कोई प्रश्न नहीं बचा जो गार्ड साहब से पूछा जाता।          वर्तमान में मैं भी चौकीदार अभियान से जुड़ कर इस गढ़ी हुई कहानी के कैसे कैसे लोग ब्रांड अम्बेसडर बन गये हैं। सवाल राजनीतिक अंधभक्ति में स्तरहीन सोच का है।युवा ज़रा ग़ौर करें, आपको क्या रटाया जा रहा है? बेहतर होता हमें भारत को विश्व विजेता बनाने वाले नारों से प्रोत्साहित किया जाता!
 ✍ (इमरान सग़ीर)

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